Wednesday, April 14, 2021
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जयनगर के सफेद बालू पर सैकड़ों एकड़ में मौसमी फल की खेती कर रहे हैं बॉर्डर क्षेत्र के किसान

कमला की सफेद बालू इन दिनों मौसमी फलों के पौधे से पटी है। कड़ाके की ठंड नवंबर और दिसंबर में सर्द बालू में बोई गई मौसमी फल तरबूज अब पौधा बनकर बालू पर फैलने लगा है। तरबूज के साथ-साथ किसान मौसमी फल ककड़ी प खीरा उपजाते हैं। साथ में कद्दू भी व्यापक पैमाने में उपजाते हैं। बॉर्डर के किसान कमला की बेजान सफेद बालू पर उपजाने वाले मौसमी फसल को हरा सोना कहते है। सैकड़ों किसानाें ने दूर-दूर तक फैली कमला की बालू पर हरे सोने की खेती की है।

अप्रैल माह से मौसमी फसल तरबूज, ककड़ी और खीरा को काटना शुरू
बालू के अंदर बोया गया बीज अब पौधे बनकर बालू से निकलने लगा है। इस पौधे को कड़ाके की ठंड, कुहासे व आंधी तूफान से बचाने के लिए किसान 24 घंटे अलर्ट है। हुनरमंद किसान हरे सोने की खेती में तकनीक का भरपूर उपयोग करते है। अप्रैल की गर्मी में लोगों को गर्मी से राहत पहुंचाने वाला मौसमी फल तरबूजा, ककड़ी व खीरा प्राप्त होने लगता है। वैसे मार्च के अंतिम सप्ताह से ही बाजार में तरबूजा मिलने लगता है। अप्रैल माह से करीब-करीब सभी किसान कमला की उजली बालू पर दूर-दूर तक बिछी मौसमी फसल तरबूज, ककड़ी और खीरा को काटना शुरू कर देते हैं।


इस मौसमी फसल को किसान बाजार में बेचते हैं। बता दें कि नवंबर व दिसंबर में किसान कमला की उजली बालू में हरा सोना यानी तरबूज का बीज बोते है। फरवरी महीने में बालू मौसमी फसल से पट जाते हैं। मार्च की शुरुआत में पौधे में फूल आना शुरू हाे जाता है और फिर चंद दिनों में फल आजाते हैं। नवंबर व दिसंबर में किसान बालू में 2.5 फीट गड्ढे खोदते हैं जिसमें पालतू जानवरों का गोबर, दो किलो खाद व जिंक डालते हैं ताकि बीज को ताकत मिल सके। एक गड्ढे में चार से पांच बीज को बोया जाता है। गड्ढे के चारों ओर करीब 5 फीट की दूरी पर वृत्ताकार क्यारी बनकर इसमें बराबर पानी डालते हैं। करीब 20 से 25 दिनों के बाद बीजों का अंकुरित होना शुरू हो जाते है।

700 से 800 से एकड़ में होती है खेती


कमला में करीब 700 से 800 एकड़ भूमि पर सैकड़ों किसान मौसमी फसल तरबूज, ककड़ी और खीरा की खेती करते हैं। नवंबर से लेकर मई-जून तक कमला के सूखी होने का फायदा किसान मौसमी फल उगाकर करते हैं और इस मौसमी फसल से बॉर्डर के किसान अच्छी रकम कमाते हैं। कई ऐसे भी किसान हैं जो साहूकार से कर्ज लेकर तरबूजा की खेती कमला की बालू पर करते हैं। अचानक कमला में बाढ़ आने की स्थिति में व्यापक पैमाने पर नुकसान का भी खतरा बना रहता है।
वार्ड पार्षद गोविंद मंडल बताते हैं कि बॉर्डर के सैकड़ों किसान कड़ी मेहनत करके कमला की बेजान बालू से अपने हुनर के द्वारा मौसमी फल तरबूज, ककड़ी, खीरा और हरी सब्जी की पैदावार करते हैं। यदि सरकार मौसमी फसल की खेती में सहयोग करती है तो यहां के सैकड़ों किसानों को काफी फायदा होगा। वहीं, बस्ती पंचायत के किसान रामाशीष यादव, उमेश यादव, राम कुमार यादव, देवेंद्र यादव, कृष्णा यादव, बबलू यादव समेत अन्य किसानां ने बताया कि मौसमी फसल मौसम पर निर्भर है। मौसम अनुकूल रहा तो लागत से करीब तीन गुना लाभ किसानों को हो जाता है। यदि मौसम प्रतिकूल रहा तो भारी नुकसान का सामना करना पड़ता है। बॉर्डर के किसानों को सरकार व प्रशासन की ओर से किसी भी प्रकार की मदद नहीं मिल रही है।

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