Sunday, January 17, 2021
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नेपाल की संसद भंग किए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के खिलाफ जारी किया कारण बताओ नोटिस

नेपाल की राजनीति में उठापटक जारी है। नेपाल की सुप्रीम कोर्ट ने संसद भंग किए जाने के फैसले को लेकर शुक्रवार को नेपाल सरकार को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। जिसमें कहा गया कि वह संसद को अचानक भंग करने के अपने निर्णय पर एक लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करे। जज ने इस मामले की अगली सुनवाई 15 जनवरी को मुकर्रर की है। 

नेपाली मीडिया के अनुसार 275 सदस्यीय संसद को भंग करने के सरकार के फैसले के खिलाफ दायर रिट याचिकाओं पर मुख्य न्यायाधीश चोलेंद्र शमशेर राणा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संवैधानिक पीठ में प्रारंभिक सुनवाई के बाद नोटिस जारी किया गया है।

पीठ ने प्रधानमंत्री कार्यालय और मंत्रिपरिषद और राष्ट्रपति कार्यालय से लिखित स्पष्टीकरण की मांग की क्योंकि उन्हें सभी रिट याचिकाओं में प्रतिवादी बनाया गया है।

अदालत ने सरकार को सदन को भंग करने के लिए सरकार द्वारा की गई सिफारिशों की एक मूल प्रति और राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी द्वारा सरकार की सिफारिशों को प्रमाणित करने के लिए किए गए निर्णय को प्रस्तुत करने के लिए भी कहा है।

पांच सदस्यीय पीठ में जस्टिस बिशंभर प्रसाद श्रेष्ठ, तेज बहादुर केसी, अनिल कुमार सिन्हा और हरि कृष्ण कार्की शामिल हैं।

बुधवार को चीफ जस्टिस राणा की एकल पीठ ने सभी रिट याचिकाओं को संवैधानिक पीठ को भेज दिया। संसद को भंग करने के सरकार के फैसले को चुनौती देते हुए कुल मिलाकर 13 रिट याचिकाएं शीर्ष अदालत में दर्ज की गई हैं। बुधवार को सुनवाई के दौरान, वरिष्ठ वकीलों ने संवैधानिक प्रावधानों का हवाला देते हुए तर्क दिया कि प्रधानमंत्री ओली को तब तक सदन को भंग करने का कोई अधिकार नहीं है जब तक कि एक वैकल्पिक सरकार बनाने की संभावना नहीं है। 

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