Sunday, October 17, 2021
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कोरोना से बेहाल नेपाल:40% से ज्यादा पॉजिटीविटी रेट के चलते 77 में से 75 जिलों में कंप्लीट लॉकडाउन, जल्द अनलॉक नहीं हुआ तो फैल सकती है भुखमरी

नेपाल में कोरोना इस कदर कहर बरपा रहा है कि फिलहाल वहां 77 में से 75 जिलों में कंप्लीट लॉकडाउन लगा है। राजधानी काठमांडू में 45 दिन के लॉकडॉउन के बाद अब केसेज कुछ कम हुए हैं।

काठमांडू के टेकू अस्पताल में संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. शेर बहादुर को राहत की सांस लेनी चाहिए थी, लेकिन अब वो पहले से ज्यादा चिंतित हैं। इसकी वजह ये है कि उन्हें जो रिपोर्टें मिल रही हैं उनके मुताबिक नेपाल में अब वायरस ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से फैल रहा है। यह नेपाल के साथ-साथ भारत के लिए भी चिंता की बात है कि क्योंकि नेपाल के सीमावर्ती इलाकों से भारत में काफी आवागमन होता है। ऐसे में नेपाल के ग्रामीण और सीमावर्ती इलाकों में कोरोना का फैलाव भारत के लिए चिंता की बात हो सकती है।

नेपाल में बहुत से लोगों का मानना कि भारत से गया वायरस

पत्रकार नेत्र केसी के मुताबिक नेपाल में बहुत से लोगों को लगता है कि वायरस की ये दूसरी लहर भारत की तरफ से आई है क्योंकि नेपाल में वायरस का वही स्ट्रेन मिला है जो भारत में मिला था। नेत्र कहते हैं, ‘नेपाल और भारत की सीमा पर बहुत से लोग इधर से उधर जाते हैं। ये भी माना जा रहा है कि वायरस का ये स्ट्रेन भारत की तरफ से ही नेपाल में आया होगा।’

संक्रामक रोग विशेषज्ञ शेर बहादुर कहते हैं, ‘दूसरी लहर के शुरुआती दिनों में भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र से अधिक मामले सामने आ रहे थे, लेकिन इसके साथ अब संक्रमण पहाड़ी इलाकों में भी पहुंच गया है।’ डॉ. शेर बहादुर के मुताबिक राजधानी के अस्पतालों में ग्रामीण क्षेत्रों से पहुंच रहे मरीजों की संख्या बढ़ रही है। डॉ. बहादुर कहते हैं, ‘जिन जिलों में अच्छे अस्पताल नहीं हैं वहां के लोग इलाज कराने काठमांडू के अस्पतालों में आ रहे हैं।’

लेकिन इस बात का दूसरा पहलू यह है कि कोरोना की दूसरी लहर भारत में तबाही मचाने के बाद अब काबू में दिख रही है, वहीं नेपाल में इस समय कोरोना पीक पर है और सीमावर्ती इलाकों में आवागमन पहले की तरह ही है। ऐसे में नेपाल से सटे यूपी-बिहार के कई जिलों में एक बार फिर कोरोना के सिर उठाने का खतरा है। नेपाल के पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट इस बात से इनकार नहीं करते हैं। उनका मानना है कि नेपाल में केस कम होने से सीमा से सटे भारतीय जिलों में कोरोना के सिर उठाने का खतरा कम हो जाएगा।

पॉजिटीविटी रेट भी है चिंता की बात

नेपाल में कोरोना महामारी का संकट पड़ोसी देश भारत से भी ज्यादा गंभीर होता जा रहा है। करीब पौने तीन करोड़ की आबादी के इस छोटे से देश में अब तक संक्रमण के 6 लाख से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। इनमें से भी आधे से ज्यादा राजधानी काठमांडू में ही सामने आए हैं। ये स्थिति तब है जब टेस्टिंग बहुत कम हो रही है। नेपाल में अब तक 8238 लोगों की मौत संक्रमण से हो चुकी है। नेपाल सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक देश में गुरुवार तक सिर्फ 31,89,104 ( इकतीस लाख नवासी हजार एक सौ चार) लोगों का आरटी-पीसीआर टेस्ट किया गया था। वहीं अब तक नेपाल में 91,368 एंटीजन टेस्ट किए गए हैं।

पॉजिटीविटी रेट के मामले में नेपाल दुनिया में सबसे ज्यादा प्रभावित देशों की सूची में शामिल है। नेपाल के अधिकतर हिस्सों में पॉजिटीविटी रेट 20 प्रतिशत से अधिक है जबकि राष्ट्रीय औसत 28 प्रतिशत है। हालांकि बीते दो सप्ताह से ये दर स्थिर बनी हुई है।

तीन सप्ताह पहले तक नेपाल में औसतन पॉजिटीविटी दर 44.67 थी जो दुनिया में सबसे ज्यादा थी। कोविड से निपटने के लिए नेपाल ने सख्त लॉकडाउन लागू किया है जिसकी वजह से ये दर कम होकर 28 प्रतिशत तक पहुंच गई है। हालांकि नेपाल के लिए चिंता की सबसे बड़ी बात ये है कि अब संक्रमण के ग्रामीण क्षेत्रों में फैल जाने का डर है। नेपाल के डॉक्टर मान रहे हैं कि हो सकता है नेपाल के ग्रामीण क्षेत्रों में इस समय हर्ड ट्रांसमिशन हो रहा हो।

नेत्र कहते हैं, ‘ग्रामीण क्षेत्रों में कोई टेस्टिंग केंद्र नहीं हैं। सरकार ने एंटीजन किट्स गांवों में भेजी हैं। नेपाल में 45 दिनों से लॉकडाउन है जिसकी वजह से काठमांडू से गांवों की तरफ पलायन हुआ है। डर है कि अब गांवों में भी वायरस फैल गया है। टेस्ट न होने की वजह से पूरी तस्वीर सामने नहीं आ रही है।’

ग्रामीण क्षेत्रों में ऑक्सीमीटर तक मौजूद नहीं

डॉ. बहादुर कहते हैं, ‘हमारा हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर पर्याप्त नहीं था। मई में अस्पतालों में जगह नहीं मिल पा रही थी। ऑक्सीजन और बेड की कमी से लोग मर रहे थे, लेकिन अब धीरे-धीरे हालात कुछ बेहतर हुए हैं।’ वे कहते हैं, ‘हमारे सामने नई चुनौती ग्रामीण क्षेत्र में संक्रमण से निपटने की है। अब तो टेस्ट से भी वायरस का पता नहीं चल रहा है। हम लोगों से एक्स रे कराने और बॉडी का ऑक्सीजन लेवल चेक करने की अपील कर रहे हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में ऑक्सीजन लेवल नापने के डिवाइस मौजूद नहीं है। बहुत से इलाकों में ना एक्सरे की सुविधा है और ना ही दवाएं उपलब्ध हैं। ये हमारे सामने सबसे बड़ी और गंभीर चुनौती है।’

नेपाल में वैक्सीन का भी संकट

नेपाल में अब तक सात लाख से भी कम लोगों को वैक्सीन के दोनों डोज जबकि सिर्फ 21 लाख लोगों को एक डोज दिया गया है। वैक्सीन उपलब्ध न होने की वजह से देश में 28 अप्रैल को पहली डोज लगानी बंद कर दी गई थी। एक मई के बाद से लोगों को दूसरा डोज ही लगाया जा रहा था। चीन से वैक्सीन मिलने के बाद अब 8 जून से फिर से टीकाकरण शुरू हुआ है।

नेपाल में वैक्सीन की कमी की चिंता यूनिसेफ ने भी जाहिर की है। यूनिसेफ की कोविड-19 वैक्सीन प्रोग्राम की प्रमुख लिली केपरानी के मुताबिक नेपाल के कुछ इलाकों में 40 फीसदी स्वास्थ्यकर्मी कोरोना से संक्रमित हैं, इस कारण वहां स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है।

लिली ने कहा, ‘इससे सिर्फ नेपाल को ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया को खतरा है। सबसे पहली प्राथमिकता उन देशों को वैक्सीन देने की होनी चाहिए जहां वैक्सीन नहीं है। नेपाल के स्वास्थ्यकर्मियों को सुरक्षित किया जाना जरूरी है। दुनिया को महामारी से बचाने का एक यही स्पष्ट रास्ता है।’

भारत और चीन से मिली है नेपाल को वैक्सीन

भारत सरकार ने नेपाल को 11 लाख डोज मदद के रूप में भेजी है। इनमें से एक लाख डोज नेपाल की सेना को दी गई हैं। वहीं, नेपाल ने भारत के सीरम इंस्टीट्यूट से बीस लाख डोज खरीदे हैं, हालांकि ये पूरी खेप अभी नेपाल को नहीं मिली है।

वरिष्ठ पत्रकार नेत्र केसी के मुताबिक, ‘नेपाल को भारत से मदद के तौर पर वैक्सीन की 11 लाख डोज मिली है। वहीं चीन ने भी करीब 8 लाख डोज भेजे हैं। लेकिन नेपाल की परेशानी ये है कि भारत से जो बीस लाख डोज उसने खरीदे थे, उनमें से सिर्फ दस लाख की ही आपूर्ति हो सकी है। बाकी दस लाख डोज भारतीय कंपनी ने नहीं भेजे हैं। वहीं चीन ने अभी तक अपनी वैक्सीन का रेट जारी नहीं किया है।’

नेपाल में उम्र के आधार पर वैक्सीनेशन किया जा रहा है। राजधानी काठमांडू के आसपास के इलाकों में 64 वर्ष से अधिक की उम्र के लोगों का टीकाकरण चल रहा है जबकि चीन की सीमा से सटे जिले में अब 18 साल से अधिक उम्र के लोगों का टीकाकरण किया जा रहा है। हाल के दिनों में 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को टीका लगना है।

नेत्र कहते हैं, ‘नेपाल सरकार ने भारत से वैक्सीन की मदद मांगी है। भारत ने नेपाल को पहले भी वैक्सीन दी है। नेपाल को उम्मीद है कि भारत आगे भी मदद करेगा।’ नेपाल के नए विदेश मंत्री रघुवीर महासेठ ने बुधवार को भारतीय राजदूत से मुलाकात के दौरान भारत से नेपाल के लिए वैक्सीन की मदद मांगी है।’

अधिक हो सकती है वास्तविक संक्रमितों की संख्या

बीते साल दिसंबर में नेपाल के एपिडेमियोलॉजी एंड डिजीज कंट्रोल डिवीजन और विश्व स्वास्थ्य संगठन ने नेपाल में सीरो सर्वे किया था जिसमें देश की 13 प्रतिशत आबादी में संक्रमण की पुष्टि हुई थी। हालांकि तब नेपाल में संक्रमण के मामले दो लाख से भी कम थे। अब तक नेपाल में छह लाख से अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं।

वहीं नेपाल सरकार के आंकड़ों के मुताबिक भले ही अभी आठ हजार लोगों की मौत की पुष्टि की गई है, लेकिन अमेरिका के वॉशिंगटन स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मैट्रिक्स एंड इवेलुएशन के अनुमान के मुताबिक जुलाई तक नेपाल में कोविड संक्रमण से मौतों का आंकड़ा 40 हजार को पार कर जाएगा।

ठप हो गया है हेल्थ सिस्टम

काठमांडू के हेल्थ रिपोर्टर सागर बुढाथोकी के मुताबिक कोविड की दूसरी लहर ने नेपाल के हेल्थ सिस्टम को ठप सा कर दिया। सागर कहते हैं, ‘अस्पतालों में ना बिस्तर थे और ना ही ऑक्सीजन। ऑक्सीजन की कमी की वजह से उन लोगों ने भी दम तोड़ दिया जिनकी जान बचाई जा सकती थी।’

सागर कहते हैं, ‘अप्रैल में दूसरी लहर ने नेपाल को जकड़ लिया था। शुरुआत में रिपोर्टर सरकार का उत्साहवर्धन करने के लिए रिपोर्टिंग कर रहे थे ताकि महामारी पर ध्यान दिया जा सके। लेकिन वास्तविक हालात बहुत खराब थे। अप्रैल के आखिरी सप्ताह में जब मैं नेपालगंज के बांके अस्पताल में गया तो जो दृश्य देखे, वो परेशान करने वाले थे। लोग अस्पताल में हमारी आंखों के सामने दम तोड़ रहे थे। संक्रमितों को बिस्तर नहीं मिल पा रहे थे। ये दृश्य हृदय विदारक थे।’

क्या तब से हालात कुछ बेहतर हुए हैं? इस सवाल पर सागर कहते हैं, ’45 दिनों के लॉकडाउन से स्थिति कुछ नियंत्रण में जरूर आई है, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती ये है कि अब संक्रमण गांवों में फैल रहा है। नेपाल के ग्रामीण क्षेत्र में हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर है ही नहीं। साथ ही लोगों में जागरूकता की भी कमी है। लोग घरों में ही बीमार पड़े हुए हैं। वो अस्पतालों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।’

नेपाल गरीब देश, यहां ज्यादा दिनों तक लॉकडाउन नहीं लगाया जा सकता

कोरोना संक्रमण की पहली लहर जब कुछ थमी तो भारत की तरह ही नेपाल में भी लोग लापरवाह हो गए थे। बाजारों में भीड़ थी और बारातों में धूम थी। इसका असर ये हुआ कि लोगों के संभलने से पहले ही दूसरी लहर ने देश को संक्रमण में जकड़ लिया है।

पत्रकार नेत्र केसी कहते हैं, ‘नेपाल एक गरीब देश हैं। यहां बहुत से लोग शहरों में मजदूरी करने आते हैं। अब इस मजदूर वर्ग के पास खाने के लिए भी नहीं है। यदि महामारी नहीं रुकी और लॉकडाउन खत्म नहीं हुआ तो लोग भूख से मरने लगेंगे।’

वहीं हेल्थ रिपोर्टर सागर कहते हैं, ‘नेपाल के पास संसाधन कम है और चुनौती बहुत बड़ी है। सरकार और देश के डॉक्टर अपने स्तर से इस संकट का मुकाबला कर रहे हैं, लेकिन नेपाल को बाहरी मदद की जरूरत है। यदि मदद नहीं पहुंची तो हालात और भयावह होंगे।’

सोर्स : दैनिक भास्कर

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